Saturday, August 25, 2018

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Tuesday, July 14, 2015

A photograph

This photograph was taken by me from my mi 4i
With increased Exposure and ISO
#Red #Green

Monday, July 13, 2015

theblogcore.com

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Thursday, May 22, 2014

1300+ Downloads of Calculator⁹

Calculator⁹

The Windows Store Application (Programming!) crosses 1300 download mark.

Thank you users!!

Click here to know more about Calculator⁹

A major update is underway soon with improved UX.
It will also include many new features while the existing features will be improved!!
Our objective is to make Calculator⁹ the best Windows Store Application for calculation. :) :)
Windows 8.1 compatibility will also be achieved.
So stay tuned and keep downloading.

Copyright © 2015, Calculator⁹

3000+ Downloads of Programming.. !!

Programming!

The Windows Store Application (Programming!) crosses 3000 download mark.
Already downloaded 3057 times.

Thank you users!!

Click here to know more about Programming!

A new update is coming soon with improved UX.
So stay tuned and keep downloading.

Copyright © 2014, Programming!

सिलचर

२ साल पुरानी बात है ये,
लेकिन लगता है अब तो...
कि १ अरसा सा हो गया है।

दिल्ली पीछे छोड़ के...
सिलचर को गया था मै जब।
बात तभी की है ये।

बहुत दूर था सिलचर।
बहुत दूर था।
दिल्ली से भी...
और मेरे दिल से भी।

ना सोचा था मैने ये कभी...
कि जाऊँगा मै उस ओर कभी।
किंतु नियति का ये खेल तो देखो।
उस दिन मै वहाँ ना सिर्फ़ जा रहा था...
बल्कि...
१ लम्बे अंतराल के लिए जा रहा था।
४ वर्ष...
हाँ ४ वर्ष।

बचपन में जब मै पढ़ता था...
पूर्वोत्तर भारत के बारे मे...
मंत्रमुग्ध मै हो जाता था।
अनोखा लगता था वो क्षेत्र मुझे।
पूर्णत रूप से अचंभित करने वाला।

यह वो जगह है -
जहा पे सर्वाधिक वर्षा होती है।
यह वो जगह है -
जहा से ब्रह्मपुत्रा...
पत्थरो को तोड़ती हुई...
चट्टानों से टकराती हुई...
प्रवाहित होती है।

उम्मीदे तो कम थी सिलचर से बहुत।
जो सफ़र के दौरान और कम होती जा रही थी।
परंतु जैसे ही मै सिलचर पंहुचा,
तो सिलचर को थोड़ा विकसित देख,
उम्मीदे मेरी किसी प्रकार कायम रही।

आज तक मेरी ये उम्मीदे कायम है।
और इन्ही उम्मीदों पे...
२ वर्ष बीत चुके है...
२ वर्ष और व्यतीत करने है।

लेकिन आज मुझे कोई खेद नही...
की मै इस ओर आया।
शायद आज भी दिल्ली से तो बहुत दूर होगा सिलचर...
किंतु अब मेरे दिल मे बस चुका है सिलचर।

हमारे प्यारे पापोन दा।

हमारे प्यारे पापोन दा आए थे। 
हमारे प्यारे पापोन दा आए थे। 
कुछ गाके गए थे। 
क्या गाके गए थे.... 
कोई वो भी समझा दो हमे....  
वैसे बहुत अच्छा लगा हमे।  
अगली बार भी हमारे प्यारे पापोन दा आएँगे।  
फिर से कुछ गाके जाएंगे।  
फिर से कुछ भी समझ मे नहीं आएगा।  
फिर से बहुत अच्छा लगेगा हमे।  
और एक बात.... 
ई कार्पेडियम का होत है।  
कोई बताओ हमे।
बताओ!!
बताओ!!